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टूटन आशुतोष अस्थाना – पुस्तक समीक्षा

  • Author: Ashutosh Asthana
  • Language: Hindi
  • Paperback: 216 pages
  • Publisher: Notion Press; 1 edition (4 February 2020)
  • ISBN-10: 1648280900

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प्रेम श्वास समान होता है जो अगर दूर जाने को हो तो हम भीतर से टूटने लगते हैं। प्रेम भाव से मनुष्य मनुष्य बनता है. यह भाव हमारे अस्तित्त्व की नींव होता है। परन्तु जब प्रेम को हय की निगाहों से देखा जाने लगे, जब प्रेम को स्वीकृति न मिले तब मनुष्य कहाँ जाये, क्या करे? हमारा समाज सदैव ही प्रेम के विरूद्ध रहा है। और सबसे अधिक आफत तब आ जाती है जब प्रेम अंतर्जातीय हो। किसी भी प्रकार के सवाल जवाब की गुंजाइश ही ख़त्म हो जाती है।

टूटन आशुतोष अस्थाना द्वारा रचित एक सरल प्रेम की जटिल कहानी है। यह कहानी है मुकेश और अनुराधा के निश्छल प्रेम की जो समाज की बेड़ियों के आगे दम तोड़ देता है। यह कहानी है अपनों के पराये हो जाने की, प्रेमी युगल के बेबस हो जाने की, औरत की अस्मिता के छिन जाने की, पुरुष प्रधानता की, समाज की रूढ़ियों की, खोखलेपन की। यह समाज अंतर्जातीय प्रेम को कभी नहीं स्वीकारता। समाज के वशीभूत होकर, अपने झूठे सम्मान के लिए हमारा परिवार भी प्रेम की पावनता के ख़िलाफ़ हो जाता है. और जब अपने ही साथ न खड़े हों तब व्यक्ति लाचार हो जाता है। प्रेम को दर्शाती यह पुस्तक एक दुखद अंत के साथ हमारे समाज को जागरूक एवं प्रगतिशील एवं संवेदनशील होने का सन्देश देती है।

टूटन की कहानी रोचकता से वर्णित की गयी है। मुख्य पात्रों का चरित्र चित्रण इस प्रकार किया गया है जैसे वे हमारे आस पास के लोग मालूम पड़ते हैं। नयी वाली हिंदी के दौर में शुद्ध हिंदी की रचना पाकर हृदय हर्षित हो गया। हालाँकि पुस्तक का कथानक कुछ विशेष नहीं था क्यूंकि हम इस प्रकार की कहानियों को पहले भी पढ़ चुके हैं। मुझे सबसे अधिक इस कहानी का लेखन आकर्षित लगा। लेखक ने काफ़ी खूबसूरती से शहरों और लोगों को शब्दों में पिरोया है। जिस तरह वह एक मनुष्य के मनोभावों का ताना बना बुनते हैं, जिस प्रकार एक एक दृश्य की आकृति खींचते हैं, वह उल्लेखनीय है। अंतर्जातीय प्रेम को लेकर समाज के रवैय्ये को मरमम्ता से प्रस्तुत किया है। आशा करती हूँ कि भविष्य में लेखक की और रचनाओं को पढ़ने का अवसर प्राप्त होगा।

अगर हिंदी के शौक़ीन हैं तो यह पुस्तक अवश्य पढ़ें। अगर सरल परन्तु हृदय को छू जाने वाली कहानी पढ़ना कहते हैं तब भी क़िताब को पढ़ा जा सकता है।

MY RATING: 3/ 5


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3 thoughts on “टूटन आशुतोष अस्थाना – पुस्तक समीक्षा

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